शनिवार, 13 मई 2017

सिर्फ 1% वर्षा-जल संचयन से झारखण्ड में संग्रह किया जा सकता है 1.12 TMC (1,12,0000000000 लीटर) पानी

आज देश के विभिन्न शहरों में पानी का संकट खड़ा हो रहा है और यह संकट सतही ओर भूजल दोनों के अभाव से उपजा है। इस संकट से निपटने के लिए हमें गांव के साथ-साथ शहरों में भी जल संग्रहण के विभिन्न तरीकों का उपयोग करना होगा। लेकिन अब सवाल उठता है कि शहरों में इसे कैसे क्रियान्वित किया जाए। दरअसल ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में वर्षा जल संग्रहण का समान अर्थ है। फर्क बस इतना है कि ग्रामीण इलाकों में जल  प्रबधंन कार्यक्रम के जरिए मिट्टी संरक्षण के साथ-साथ जल संग्रहण किया जाता है। वहीं दूसरी ओर शहरी इलाकों में जगह की कमी के कारण छत पर जल संग्रहण करना ज्यादा मुनासिब होता है।
     झारखण्ड में वर्षा जल संचयन का कार्य थोड़ी सी जागरूकता बढ़ने पर बहुत कठिन कार्य नहीं रह जायेगा ।  झारखण्ड राज्य ( कुल क्षेत्रफल 79,714 वर्ग किमी )में औसत वार्षिक वर्षा 1400 मिमी होती है अगर हम सिर्फ एक हेक्टेयर भूमि पर गिरने वाली केवल 100 मिमी वर्षा के जल को संग्रहीत कर सकें तो यह आयतन 1 मिलियन लीटर  हो जायेगा, इसी प्रकार यदि हम पूरे झारखण्ड में  होने वाली कुल वर्षा ( 1400 मिमी) का 1 प्रतिशत संग्रह करने में सक्षम हो जाएँ तो 1.12 TMC (ट्रिलियन मीट्रिक क्यूब) अर्थात 1120000000000   लीटर पानी पानी बचा सकते हैं। शहरी क्षेत्रो में वर्षा जल संचयन के तरीके ग्रामीण इलाकों में तो वर्षा जल संचय करना नहीं पर शहरी क्षेत्रों में जहाँ जमीन की कमी होती है वहां निम्न तरीके अपनाये जा सकते हैं-
(1) निष्क्रिय हो चुके पेय जल कुओं/ सिचांई कुओं की मदद से (2) ख़राब पड़े बोरवैल या नलकूप की मदद से


 (3) पुनर्भरण शाफ्ट की मदद से (4) पुनर्भरण पिट (गङ्ढा) द्वारा (5) पुनर्भरण खाई द्वारा

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